कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और प्राकृतिक आपदाएँ अक्सर किसानों को भारी नुकसान पहुँचाती हैं। इन्हीं परिस्थितियों से निपटने और किसानों को राहत पहुँचाने के लिए RBC 6(4) प्रावधान बनाया गया है।
इसका मुख्य उद्देश्य है:
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देना।
फसल नुक़सान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार करना।
रिपोर्ट के आधार पर किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना।
इसके लिए कृषि विभाग, पंचायत विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौके पर जाकर फसल क्षति का आंकलन करती है।
फसल नुक़सान रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
SAARA पोर्टल पर लॉगिन
पटवारी को अपना यूज़रनेम और पासवर्ड डालकर लॉगिन करना होगा।
डैशबोर्ड खोलना
लॉगिन के बाद डैशबोर्ड दिखाई देगा।
ग्रामवार फसल रिकॉर्ड डाउनलोड करना
"गिरदावरी रिपोर्ट → ग्रामवार रिपोर्ट" का चयन करें।
जिला, तहसील, RI सर्किल, हल्का और ग्राम चुनें।
खरीफ सीजन की ग्रामवार/खसरा वार फसल जानकारी प्राप्त करें।

डेटा Google Sheet में पेस्ट करना
रिपोर्ट से "कृषक वार" डेटा कॉपी करें।
Google Sheet में नया शीट खोलकर A1 से पेस्ट करें।

डेटा की सफाई और फिल्टरिंग
Formatting Reset करें।
Duplicate डेटा हटाएँ।
फ़िल्टर लगाकर सिर्फ "सोयाबीन" वाली प्रविष्टियाँ रखें।

फॉर्मूलों से कैलकुलेशन
प्रभावित सर्वे नंबर, प्रभावित फसल, प्रभावित रकबा आदि के लिए फार्मूले इस्तेमाल करें।
कुल प्रभावित रकबा की गणना करें।
फाइनल Excel शीट तैयार करना
Google Sheet से क्लीन डेटा Excel में Paste as Value करें।
किसान के खाते का कुल रकबा (B1 अनुसार) डालें।
सोयाबीन के अलावा अन्य फसलों का डेटा हटाएँ।
रिपोर्ट का सत्यापन और अनुमोदन
तैयार रिपोर्ट को संबंधित अधिकारियों द्वारा सत्यापित और अनुमोदित किया जाता है।
अंतिम रिपोर्ट और राहत वितरण
रिपोर्ट अनुमोदन के बाद किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
इस प्रक्रिया के अंत में, किसानों से केवल उनकी आधार डिटेल्स और बैंक डिटेल्स एकत्र करनी होती हैं।
बी1 अनुसार खातेदारों के पिता/पति का नाम और निवास ग्राम दर्ज करना अनिवार्य है।
इसके लिए आप अपनी बी-1 को PDF से Excel में कन्वर्ट करवाकर डेटा सीधे पत्रक मे कॉपी पेस्ट भी कर सकते है |
इस प्रकार सुव्यवस्थित डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से फसल नुक़सान का सही आकलन कर किसानों को शीघ्र राहत दी जाती है।
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